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#BoycottChineseProducts: चीन से व्यापार बंद करने से किसका नुकसान?

चीन ने एक बार फिर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में मसूद अजहर को ग्लोबल आतंकी लिस्ट में शामिल होने से बचा लिया। चीन ने फैसले से ऐन पहले स्थायी सदस्य होने के नाते अपने वीटो अधिकार का इस्तेमाल किया और प्रस्ताव को एक बार फिर होल्ड पर डलवा दिया। बता दें की मसूद अजहर के खिलाफ ये प्रस्ताव अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस ने दिया। चीन के इस कदम से दुनिया भर में उसकी किरकिरी हो रही है , इतना ही नहीं, अमेरिका ने तो खुलेआम चीन को लताड़ भी लगा दी।

ट्विटर पर शुरू हुई चीन के खिलाफ जंग

चीन के इस कदम के बाद भारत में एक बार फिर चीन को लेकर कई जगहों पर विरोध शुरू हो गया है। सोशल मीडिया पर #BoycottChineseProducts हैशटैग ट्रेंड कर रहा है। लोग बढ़ चढ़ कर इस हैशटैग के साथ ट्वीट कर रहे हैं और चाइनीज़ उत्पादों के बहिष्कार की मांग कर रहे हैं। खबर लिखे जाने तक इस हैशटैग के साथ करीब 33,000 से भी ज्यादा ट्वीट किए जा चुके थे।

ट्विटर पर चल रही इस मुहिम को लेकर लोगों में उत्साह और अखरोश है लेकिन इससे जुड़े कुछ सवाल भी हैं। अगर चीन के साथ हम व्यापार बंद कर दें तो नुकसान किसका होगा। इसके साथ ही क्या जमीनी स्तर पे यह सच में मुमकिन है कि हम चीनी उत्पादों का पूरी तरह से बहिष्कार कर सकें?

बता दें कि अगर हम चीन के साथ व्यापार बंद कर दें तो इससे चीन को बहुत बड़ा झटका लगेगा। भारत चीन से बहुत बड़ी मात्रा में उत्पादों को आयात करता है। अगर व्यापार बंद हो जाए तो जाहिर हैं की चीन के लिए यह काफी बड़ा झटका साबित हो सकता है।

कितना है भारत और चीन के बीच व्यापार?

साल 2017-18 के आंकड़ों पे नज़र डालें तो भारत और चीन के बीच लगभग 5 लाख 78 हजार करोड़ का व्यापार हुआ था। इसमें से भारत ने चीन में 85,994 करोड़ का निर्यात किया। जबकि चीन से भारत में 4 लाख 92 हजार करोड़ रुपये का आयात किया गया। इसका मतलब है कि बंद करने पर चीन को तक़रीबन पांच लाख करोड़ रुपये का घाटा हो सकता है।

इस सब के बीच बड़ा सवाल ये भी है कि क्या हकीकत में यह मुमकिन है कि भारत चीन के सभी तरह के उत्पादों का बहिष्कार कर सके? इसका जवाब है “नहीं”।

क्या है चीन का इलाज?

एक्सपर्ट मानते हैं कि भारत को चीन पर अंतर्राष्ट्रीय दबाव बढ़ाने की जरूरत है। रक्षा विशेषज्ञ पीके सहगल के मुताबिक “चाइना का दोहरा रवैया पूरी दुनिया के सामने उजागर हो गया है। चीन भारत की संवेदनशीलता और वैश्विक समुदाय की बिल्कुल परवाह नहीं करता है। भारत के पास जैश के खिलाफ अपने हिसाब से कार्रवाई करने के अलावा और कोई विकल्प नहीं है।”


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